Santan Vrat
Ashwin Krishna Ashtami
जीवित्पुत्रिका / जितिया व्रत कथा
Jivitputrika Jitiya Vrat – Complete 3-Day Vidhi & Katha in Hindi
जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) संतान की दीर्घायु, आरोग्य और समृद्धि के लिए माताओं द्वारा किया जाने वाला तीन-दिवसीय पवित्र व्रत है। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। नहाय-खाय, खुर-जितिया निर्जला उपवास और नवमी पारण — तीनों चरणों का विधिपूर्वक पालन आवश्यक है।
🎙 अभी पूजा शुरू करें — Live Puja Room खोलेंतीन-दिवसीय व्रत क्रम
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दिन 1सप्तमी — नहाय-खाय
स्नान और सात्विक भोजनसूर्योदय से पूर्व स्नान करें। मछली, चावल, दही और फल ग्रहण करें। अगले दिन के निर्जला व्रत की तैयारी करें।
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दिन 2अष्टमी — खुर-जितिया
निर्जला व्रत और जितिया पूजनसंपूर्ण दिन और रात निर्जला उपवास रखें। जीमूतवाहन की पूजा करें और जितिया कथा श्रवण करें।
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दिन 3नवमी — पारण
व्रत का पारणप्रातःकाल स्नान कर नोनी का साग, मरूआ की रोटी और मछली से पारण करें।
पूजा सामग्री (Puja Samagri)
जीमूतवाहन मूर्ति / चित्र
जीमूतवाहन की मूर्ति या चित्र पूजा के लिए।
पीपल की पत्तियां
जितिया पूजन में पीपल पत्ते अनिवार्य हैं।
मिट्टी का दीपक
मिट्टी के दीपक से पूजा करें।
रोली, सिंदूर, चंदन
पूजन सामग्री।
धूप, अगरबत्ती
पूजा के लिए।
मछली (नहाय-खाय / पारण)
परंपरानुसार मछली नहाय-खाय और पारण में ग्रहण की जाती है।
नोनी का साग + मरूआ रोटी
पारण के लिए विशेष प्रसाद।
फल और मिठाई
नैवेद्य के लिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
जितिया व्रत 2026 में कब है?
जितिया व्रत 2026 में आश्विन कृष्ण अष्टमी को पड़ता है — सितंबर-अक्टूबर माह में।
जितिया व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
खुर-जितिया (अष्टमी) के दिन निर्जला व्रत रखें — जल भी नहीं पीना चाहिए।
क्या यह व्रत सभी माताएं कर सकती हैं?
हाँ, सभी माताएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत कर सकती हैं।